
Services
At SRSDM Ayurveda, we offer a range of traditional Ayurvedic services designed to support natural healing, restore balance, and promote overall wellness.
Every therapy is approached with individual needs in mind, combining Ayurvedic principles with personalized care for a more meaningful wellness experience.
क्या आप बार-बार लौटने वाली स्वास्थ्य समस्याओं और अस्थायी राहत से परेशान हैं?
Tired of recurring health problems and temporary relief?
आयुर्वेद आपको केवल रोग के रूप में नहीं, बल्कि एक सम्पूर्ण व्यक्ति के रूप में समझता है।
Ayurveda understands you as a whole person—not just a disease or symptom.
आपकी प्रकृति, विकृति, दोष, अग्नि, आहार, जीवनशैली एवं मानसिक स्थिति को समझकर व्यक्तिगत चिकित्सा मार्गदर्शन दिया जाता है।
Your Prakriti, Vikriti, Dosha, Agni, diet, lifestyle and overall well-being are considered for personalized guidance.
हमारा उद्देश्य केवल लक्षणों को दबाना नहीं, बल्कि स्वास्थ्य समस्या के मूल कारणों को समझकर शरीर के प्राकृतिक संतुलन को बेहतर बनाने में सहायता करना है।
Our approach goes beyond symptom management to understand the underlying factors and support the body’s natural balance.
हर व्यक्ति अलग है, इसलिए उसकी चिकित्सा भी व्यक्तिगत होनी चाहिए।
Every individual is unique, therefore the approach to care should be personalized.
अपने स्वास्थ्य को बेहतर समझने की शुरुआत करें — आज ही Ayurvedic Consultation के लिए संपर्क करें।
Take the first step towards understanding your health — consult an Ayurveda expert today.
अब आयुर्वेदिक परामर्श आपके घर से — सरल, सुविधाजनक और व्यक्तिगत।
Authentic Ayurvedic Guidance, Wherever You Are.
अपनी प्रकृति, लक्षण, आहार, दिनचर्या, जीवनशैली एवं मेडिकल रिपोर्ट्स के आधार पर व्यक्तिगत आयुर्वेदिक मार्गदर्शन प्राप्त करें।
हमारा उद्देश्य केवल लक्षणों पर ध्यान देना नहीं, बल्कि आपकी स्वास्थ्य-स्थिति को समग्र रूप से समझकर उचित आयुर्वेदिक मार्गदर्शन प्रदान करना है।
🎧 Audio Consultation | ऑडियो कंसल्टेशन
📹 Video Consultation | वीडियो कंसल्टेशन
घर बैठे विशेषज्ञ से जुड़ें और अपने स्वास्थ्य की सही दिशा में पहला कदम उठाएँ।
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“नाड़ी केवल स्पंदन नहीं… शरीर की स्थिति को समझने का एक आयुर्वेदिक माध्यम है।”
“The pulse is not merely a beat; it is one of the traditional ways Ayurveda assesses the body.”
“रोगमादौ परीक्षेत्, ततोऽस्यौषधमाचरेत्।”
पहले रोगी एवं रोग की सम्यक् परीक्षा, तत्पश्चात उचित चिकित्सा।
आयुर्वेद की पारंपरिक नाड़ी परीक्षा के माध्यम से रोगी की प्रकृति, विकृति, दोष, अग्नि एवं स्वास्थ्य-स्थिति को समझने का प्रयास किया जाता है।
Through traditional Nadi Pariksha, an Ayurvedic assessment is made along with clinical history and examination to understand the individual’s constitution and current health imbalance.
अपनी प्रकृति को समझें • अपने स्वास्थ्य को समझें
Understand Your Prakriti • Understand Your Health
📍 In-Person Nadi Pariksha Available प्रत्यक्ष नाड़ी परीक्षा हेतु अपॉइंटमेंट आवश्यक।
क्या आप सही खाना चाहते हैं, लेकिन समझ नहीं पा रहे कि आपके शरीर के लिए “सही” क्या है?
Confused about what to eat for YOUR body and lifestyle?
आयुर्वेद मानता है कि एक ही आहार हर व्यक्ति के लिए समान रूप से उपयुक्त नहीं होता। आपकी प्रकृति, अग्नि, ऋतु, आयु, दिनचर्या और स्वास्थ्य-स्थिति के अनुसार आहार एवं जीवनशैली का व्यक्तिगत मार्गदर्शन आवश्यक है।
Ayurvedic Diet & Lifestyle Consultation में आपके दैनिक भोजन, दिनचर्या और जीवनशैली को समझकर व्यावहारिक एवं व्यक्तिगत recommendations दी जाती हैं।
Personalized Diet Guidance | व्यक्तिगत आहार मार्गदर्शन
🌿 Lifestyle & Dinacharya | जीवनशैली एवं दिनचर्या
⚖️ Healthy Weight Management | स्वस्थ वजन प्रबंधन
☀️ Ritucharya Guidance | ऋतु के अनुसार जीवनशैली
🧘 Mind–Body Wellness | मन एवं शरीर का संतुलन
“हिताहितं सुखं दुःखमायुस्तस्य हिताहितम्। मानं च तच्च यत्रोक्तमायुर्वेदः स उच्यते॥”
“Ayurveda guides us towards understanding what is beneficial and harmful for life and health.”
🌱 आपका भोजन आपकी प्रकृति के अनुसार।
Your Diet. Your Lifestyle. Your Prakriti.
आज ही Personal Ayurvedic Diet & Lifestyle Consultation बुक करें।
क्या आपका मन भी लगातार थका हुआ रहता है?
क्या आपको बार-बार तनाव, चिंता, चिड़चिड़ापन, बेचैनी, नींद की परेशानी या बिना किसी स्पष्ट कारण के मानसिक थकान महसूस होती है?
क्या छोटी-छोटी बातें परेशान करने लगी हैं?
क्या मन किसी काम में नहीं लगता?
क्या आप चाहते हुए भी खुद को रिलैक्स नहीं कर पाते?
इन्हें केवल “टेंशन” कहकर नजरअंदाज न करें। आपके मन और शरीर को भी सही देखभाल की आवश्यकता है।
🌿 Ayurvedic Mental Wellness & Stress Counselling व्यक्ति की प्रकृति, दिनचर्या, आहार, निद्रा और मानसिक अवस्था को समझकर व्यक्तिगत मार्गदर्शन।
📞 मन को समझिए, समस्या को टालिए नहीं—समय पर परामर्श लीजिए।
“प्रसन्न आत्मेन्द्रिय मनः स्वस्थ इत्यभिधीयते।”
स्वास्थ्य केवल शरीर का नहीं, मन की प्रसन्नता और संतुलन का भी नाम है।
रिश्तों में दूरी बढ़ रही है? बात छोटी है, लेकिन मन भारी रहता है?
क्या पति-पत्नी के बीच बार-बार मतभेद, गलतफहमी या संवाद की कमी हो रही है?
क्या परिवार में छोटी-छोटी बातों पर तनाव और विवाद बढ़ने लगे हैं?
क्या आप चाहते हैं कि रिश्ते बेहतर हों, लेकिन समझ नहीं आ रहा कि शुरुआत कहाँ से करें?
रिश्तों को टूटने का इंतज़ार न करें—समय रहते संवाद और मार्गदर्शन लें।
Relationship & Family Counselling
व्यक्तिगत एवं पारिवारिक परिस्थितियों को समझते हुए Communication, Emotional Understanding, Conflict Management और Healthy Relationships के लिए परामर्श।
🌿 एक बेहतर रिश्ता, बेहतर मानसिक स्वास्थ्य और बेहतर परिवार की शुरुआत सही समझ से होती है।
& Procedures
Abhyanga (अभ्यंग)
|अभ्यङ्गमाचरेन्नित्यं स जराश्रमवातहः।
दृष्टिप्रसादपुष्ट्यायु: स्वप्नसुत्वक्त्वदार्ढ्यकृत्॥
Reference: Aṣṭāṅga Hṛdaya, Sūtrasthāna 2/8
Abhyanga is a classical Ayurvedic oil massage and an essential part of Dinacharya (daily regimen). Regular Abhyanga pacifies Vata Dosha, nourishes body tissues, promotes healthy skin, improves circulation, enhances strength, and supports sound sleep and longevity.
अभ्यंग आयुर्वेद की शास्त्रीय तैल-मालिश है। नियमित अभ्यंग वात दोष का शमन करता है, शरीर का पोषण करता है, त्वचा को स्वस्थ रखता है तथा बल, आयु और उत्तम निद्रा प्रदान करता है।
Shirodhara (शिरोधारा)
|शिरोबस्तिः शिरःपिचुः अभ्यङ्गः परिसेचनम्।
एते मूर्धतैलाः प्रोक्ताः क्रमशो गुणवत्तराः॥
Reference: Aṣṭāṅga Hṛdaya, Sūtrasthāna 22
Shirodhara is a relaxing Ayurvedic therapy in which a continuous stream of medicated oil, buttermilk, or herbal decoction is poured over the forehead to calm the nervous system and promote mental relaxation.
शिरोधारा में औषधीय तैल या अन्य द्रव की सतत धारा ललाट पर प्रवाहित की जाती है। यह मन एवं तंत्रिका तंत्र को शांत करने वाली प्रमुख आयुर्वेदिक चिकित्सा है।
Patra Pinda Sweda (पत्र पिण्ड स्वेद)
Patra Pinda Sweda is a herbal bolus fomentation therapy using medicinal leaves. It provides warmth to the affected area and helps relieve pain, stiffness, and inflammation.
पत्र पिण्ड स्वेद में औषधीय पत्तों की पोटली द्वारा स्वेदन किया जाता है। यह दर्द, सूजन, जकड़न तथा वात-कफ जन्य विकारों में लाभकारी आयुर्वेदिक चिकित्सा है।
Kati Basti (कटि बस्ति)
|स्नेहस्वेदौ वातहरौ।
Reference: Charaka Saṁhitā
Kati Basti is a localized therapy in which warm medicated oil is retained over the lower back for a specific duration. It nourishes the tissues and supports spinal health.
कटि बस्ति में कमर के भाग पर औषधीय तैल को विशेष विधि से कुछ समय तक रखा जाता है। यह कटिशूल, गृध्रसी एवं कमर से संबंधित वात विकारों में उपयोगी है।
Netra Tarpana (नेत्र तर्पण)
Reference: Aṣṭāṅga Hṛdaya, Uttara Tantra
Netra Tarpana is a rejuvenating Ayurvedic eye therapy using medicated ghee to nourish and soothe the eyes.
नेत्र तर्पण औषधीय घृत द्वारा की जाने वाली आयुर्वेदिक नेत्र चिकित्सा है। यह नेत्रों का पोषण करती है तथा शुष्कता एवं थकान को कम करने में सहायक होती है।
Agnikarma (अग्निकर्म)
|अग्निकर्मणा व्याधिर्न पुनरावर्तते।
Reference: Suśruta Saṁhitā, Sūtrasthāna 12
Agnikarma is a specialized para-surgical Ayurvedic procedure that uses controlled therapeutic heat for the management of chronic pain and musculoskeletal disorders.
अग्निकर्म आयुर्वेद की एक विशिष्ट पराशल्य चिकित्सा है, जिसमें नियंत्रित ऊष्मा द्वारा पुराने दर्द एवं स्नायु-अस्थि विकारों का उपचार किया जाता है।
Cupping Therapy (कपिंग थेरेपी)
Cupping Therapy is a complementary therapeutic technique in which specially designed cups are placed on the skin to create controlled suction. The suction helps improve local blood circulation, reduce muscle tension, promote relaxation, and support the body’s natural healing process. At SRSDM Ayurveda, Cupping Therapy is performed after proper clinical assessment and is often combined with Ayurvedic treatment whenever appropriate.
कपिंग थेरेपी एक सहायक उपचार पद्धति है, जिसमें विशेष कपों की सहायता से त्वचा पर नियंत्रित निर्वात (सक्शन) बनाया जाता है। इससे स्थानीय रक्तसंचार में सुधार, मांसपेशियों के तनाव में कमी, शरीर को विश्रांति तथा प्राकृतिक उपचार प्रक्रिया को सहयोग मिलता है। SRSDM Ayurveda में यह चिकित्सा उचित चिकित्सकीय परीक्षण के बाद तथा आवश्यकता होने पर आयुर्वेदिक उपचार के साथ दी जाती है।
Benefits | लाभ
Helps relieve muscle pain and stiffness.
मांसपेशियों के दर्द एवं जकड़न में सहायता।
Supports healthy blood circulation.
रक्तसंचार को बेहतर बनाने में सहायक।
Promotes relaxation and stress relief.
तनाव कम करने एवं विश्रांति प्रदान करने में सहायक।
May help reduce neck, shoulder, and back discomfort.
गर्दन, कंधे एवं कमर के दर्द में सहायक।
Supports recovery after physical exertion.
शारीरिक परिश्रम के बाद रिकवरी में सहायता।
Greeva Basti (ग्रीवा बस्ती)
गर्दन के दर्द और जकड़न से परेशान हैं?
आयुर्वेदिक ग्रीवा बस्ती से गर्दन को दें प्राकृतिक राहत।
ग्रीवा बस्ती में गर्दन के प्रभावित भाग पर विशेष आटे से बनाया गया घेरा बनाकर उसमें गुनगुना औषधीय तेल निर्धारित समय तक रखा जाता है। यह एक स्थानीय आयुर्वेदिक उपचार पद्धति है, जिसका चयन रोगी की स्थिति के अनुसार किया जाता है।
✨ ग्रीवा बस्ती के प्रमुख लाभ
गर्दन के दर्द में राहत देने में सहायक
गर्दन की जकड़न और stiffness कम करने में सहायक
गर्दन की movement एवं flexibility में सहायता
गर्दन और कंधों की मांसपेशियों को आराम देने में सहायक
लंबे समय तक बैठने/काम करने से होने वाले neck discomfort में उपयोगी
स्थानीय रक्तसंचार में सहायता
👨💻 किन लोगों के लिए उपयोगी हो सकती है?
Cervical stiffness • Neck Pain • गर्दन-कंधे का तनाव • लंबे समय तक कंप्यूटर/मोबाइल उपयोग से होने वाली जकड़न आदि में चिकित्सकीय मूल्यांकन के बाद उपयोग किया जा सकता है।
🌿 गर्दन को दें आयुर्वेद का स्पर्श
अगर गर्दन का दर्द या जकड़न बार-बार परेशान कर रही है, तो आयुर्वेदिक चिकित्सकीय परामर्श लेकर उचित उपचार जानें।
आज ही परामर्श के लिए संपर्क करें।
Swedana Therapy
(स्वेदन चिकित्सा)
शरीर की जकड़न और दर्द से परेशान हैं?
औषधीय स्वेदन से शरीर को दें गर्माहट, आराम और गतिशीलता।
स्वेदन आयुर्वेद की एक पारंपरिक Sudation Therapy है, जिसमें औषधीय भाप या नियंत्रित ऊष्मा द्वारा शरीर के आवश्यक भाग में स्वेदन कराया जाता है। यह विशेष रूप से मांसपेशियों की जकड़न, stiffness और वात-कफ प्रधान समस्याओं में चिकित्सकीय सलाह के अनुसार उपयोगी हो सकता है।
✨ आपको स्वेदन की आवश्यकता हो सकती है, अगर—
सुबह उठते ही शरीर या जोड़ों में जकड़न रहती है।
गर्दन, कंधे या कमर में stiffness और भारीपन महसूस होता है।
मांसपेशियों में दर्द, तनाव या थकान रहती है।
लंबे समय तक बैठने के बाद शरीर अकड़ जाता है।
चोट/व्यायाम के बाद मांसपेशियों में जकड़न महसूस होती है।
पंचकर्म की तैयारी के लिए चिकित्सक ने स्वेदन निर्धारित किया है।
🔥 स्वेदन से क्या लाभ मिल सकते हैं?
जकड़न में राहत • मांसपेशियों को रिलैक्स करने में सहायक • गतिशीलता में सुधार • स्थानीय रक्तसंचार में सहायता • शरीर को हल्का एवं आरामदायक महसूस कराने में सहायक
🌿 आयुर्वेदिक स्वेदन की विशेषता
यह कोई एक ही प्रकार की Steam Therapy नहीं है। नाड़ी स्वेदन, बाष्प स्वेदन, पिंड स्वेदन एवं स्थानीय स्वेदन जैसी विधियों का चयन व्यक्ति की स्थिति के अनुसार किया जाता है।
> हर दर्द के लिए एक जैसी थेरेपी नहीं होती। सही स्वेदन का चयन चिकित्सकीय मूल्यांकन के बाद किया जाता है।
📞 क्या आप भी जकड़न और दर्द से परेशान हैं?
एक बार आयुर्वेदिक चिकित्सकीय परामर्श लें और जानें—आपके लिए कौन-सी स्वेदन विधि उपयुक्त है।
आज ही परामर्श के लिए संपर्क करें।
Lepa Therapy (आयुर्वेदिक लेप चिकित्सा)
आयुर्वेद में लेप चिकित्सा के अंतर्गत औषधीय वनस्पतियों एवं द्रव्यों से तैयार पेस्ट को शरीर के विशेष भाग पर चिकित्सकीय आवश्यकता के अनुसार लगाया जाता है। यह मुख (Face), त्वचा, जोड़, मांसपेशियों तथा सूजन/दर्द वाले स्थानीय भागों में अलग-अलग उद्देश्य से प्रयोग की जाती है।
✨ प्रमुख लेप एवं उनके उपयोग
1. मुखलेप (Mukha Lepa)
चेहरे की त्वचा की देखभाल, तैलीय त्वचा, मुहाँसे एवं त्वचा की विभिन्न समस्याओं में प्रकृति एवं स्थिति के अनुसार।
2. शोथहर लेप (Anti-inflammatory Lepa)
स्थानीय सूजन, भारीपन एवं inflammatory discomfort में सहायक।
3. वेदनाहर लेप (Pain-relieving Lepa)
जोड़ों एवं मांसपेशियों के स्थानीय दर्द में चिकित्सकीय आवश्यकता के अनुसार।
4. संधि लेप (Joint Lepa)
घुटने, कंधे, कोहनी एवं अन्य जोड़ों के दर्द और जकड़न में सहायक।
5. वातहर लेप
वात प्रधान दर्द, stiffness एवं musculoskeletal complaints में उपयोग किया जा सकता है।
6. त्वक् विकारों में लेप
कुछ त्वचा संबंधी स्थितियों में औषधीय लेप का प्रयोग रोग की प्रकृति के अनुसार किया जाता है।
7. व्रण/स्थानीय उपचारात्मक लेप
कुछ विशेष स्थानीय त्वचा एवं व्रण संबंधी स्थितियों में चिकित्सकीय निर्देशानुसार।
🌿 आयुर्वेद की खासियत
एक समस्या — एक ही लेप नहीं।
लेप का चयन दोष, रोग, स्थान, ऋतु, त्वचा की प्रकृति और रोगी की अवस्था को ध्यान में रखकर किया जाता है।
Pichu Therapy( पिचू चिकित्सा )
स्थानीय दर्द और जकड़न में आयुर्वेदिक उपचार का सरल एवं प्रभावी तरीका
पिचू आयुर्वेद की एक प्रमुख स्थानीय बाह्य चिकित्सा है, जिसमें उपयुक्त औषधीय द्रव्य में भिगोए हुए कपास या मुलायम कपड़े को शरीर के निर्धारित अंग पर कुछ समय के लिए रखा जाता है। इसका प्रयोग रोग, दोष, स्थान और रोगी की अवस्था के अनुसार किया जाता है।
✨ पिचू चिकित्सा के प्रमुख लाभ
स्थानीय दर्द और जकड़न में राहत देने में सहायक
मांसपेशियों एवं soft tissues को आराम देने में सहायक
जोड़ों की stiffness एवं discomfort में उपयोगी
वात प्रधान स्थानीय विकारों में सहायक
प्रभावित स्थान पर औषधीय प्रभाव पहुँचाने में सहायता
गर्दन, कंधे, कमर एवं अन्य musculoskeletal क्षेत्रों में चिकित्सकीय आवश्यकता के अनुसार उपयोगी
🌿 पिचू कहाँ किया जाता है?
ग्रीवा (गर्दन) • कटि (कमर) • जानु (घुटना) • कंधा • संधि एवं मांसपेशियों के अन्य प्रभावित भाग
पिचू में प्रयुक्त औषधीय तेल या घृत का चयन रोगी की प्रकृति, रोग एवं प्रभावित स्थान के अनुसार चिकित्सक द्वारा किया जाता है।
🔸 पिचू और अन्य स्थानीय उपचार
पिचू को आवश्यकता के अनुसार अभ्यंग, स्वेदन, जानु बस्ती, ग्रीवा बस्ती या अन्य आयुर्वेदिक उपचारों के साथ भी चिकित्सकीय उपचार योजना में शामिल किया जा सकता है।
महत्वपूर्ण: पिचू में प्रयुक्त द्रव्य, तापमान, अवधि और उपचार की आवृत्ति रोगी की स्थिति के अनुसार चिकित्सक द्वारा निर्धारित की जानी चाहिए।
कर्णपूरण चिकित्सा | Karna Purna
कानों की देखभाल के लिए आयुर्वेद की पारंपरिक चिकित्सा
कर्णपूरण आयुर्वेद की एक प्रमुख स्थानीय चिकित्सा पद्धति है, जिसमें चिकित्सकीय आवश्यकता के अनुसार गुनगुने औषधीय तेल या घृत को कान में निर्धारित मात्रा एवं अवधि तक रखा जाता है। इसका उद्देश्य कान के आसपास के क्षेत्र में वात-संतुलन एवं स्थानीय आराम प्रदान करना है।
✨ कर्णपूरण के प्रमुख लाभ
कान में रूखापन एवं dryness कम करने में सहायक
कान के आसपास होने वाले discomfort में राहत देने में सहायक
कान एवं आसपास के क्षेत्र को स्निग्धता प्रदान करता है
कान में भारीपन या तनाव की अनुभूति में उपयोगी हो सकता है
गर्दन एवं जबड़े के आसपास के तनाव में स्थानीय आराम देने में सहायक
कानों की सामान्य देखभाल में आयुर्वेदिक पद्धति के रूप में उपयोग
🌿 किन स्थितियों में उपयोग किया जा सकता है?
कर्णशूल (Ear discomfort), कर्णशोष (Dryness), कान में भारीपन, वातप्रधान कर्ण विकार आदि में रोग की स्थिति के अनुसार चिकित्सकीय सलाह से कर्णपूरण किया जा सकता है।
⚕️ महत्वपूर्ण सावधानी
कान में बिना जांच के कोई भी तेल या द्रव्य न डालें। कान में संक्रमण, कान से पानी/पीप या रक्त आना, पर्दे में छेद (perforation), तेज दर्द अथवा अचानक सुनाई कम देना जैसी स्थिति में पहले चिकित्सकीय परीक्षण आवश्यक है।
विद्धकर्म | Viddha Karma
विद्धकर्म आयुर्वेद की एक शास्त्रीय पराशल्य चिकित्सा पद्धति है, जिसमें शरीर के चयनित बिंदुओं पर विशेष शलाका/सुई द्वारा नियंत्रित वेधन किया जाता है। इसका उपयोग चिकित्सकीय मूल्यांकन के अनुसार दर्द, जकड़न एवं कुछ वातप्रधान मस्कुलोस्केलेटल समस्याओं में किया जा सकता है।
प्रमुख लाभ
स्थानीय दर्द एवं जकड़न में राहत
मांसपेशियों के तनाव में सहायक
स्थानीय रक्तसंचार में सहायता
गतिशीलता में सुधार में सहायक
Disclaimer: यह एक invasive प्रक्रिया है। इसे केवल योग्य चिकित्सक द्वारा उचित clinical assessment एवं aseptic precautions के साथ ही कराया जाना चाहिए। हर रोगी के लिए यह उपयुक्त नहीं होती।
Yoni Pichu | योनि पिचु
A Traditional Ayurvedic Local Therapy for Women’s Wellness
महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए पारंपरिक आयुर्वेदिक स्थानीय चिकित्सा
Yoni Pichu is a traditional Ayurvedic procedure in which a sterile cotton swab or suitable sterile material, appropriately medicated with selected Ayurvedic oil or preparation, is placed locally for a prescribed duration under professional supervision.
योनि पिचु एक पारंपरिक आयुर्वेदिक स्थानीय चिकित्सा प्रक्रिया है, जिसमें चिकित्सकीय सलाह के अनुसार उपयुक्त औषधीय तेल/योग से अभ्यक्त sterile cotton या उपयुक्त sterile material को निर्धारित अवधि के लिए स्थानीय रूप से रखा जाता है।
It may be considered as part of individualized Ayurvedic care for selected vaginal dryness, local discomfort and certain gynecological conditions, after proper clinical assessment.
यह चिकित्सा उचित परीक्षण एवं चिकित्सकीय मूल्यांकन के बाद कुछ चयनित स्थितियों जैसे स्थानीय शुष्कता, असहजता एवं स्त्री-रोग संबंधी समस्याओं में व्यक्तिगत उपचार योजना के एक भाग के रूप में उपयोग की जा सकती है।
✨ Personalized Ayurvedic Assessment | व्यक्तिगत आयुर्वेदिक मूल्यांकन
✨ Medicated Local Therapy | औषधीय स्थानीय चिकित्सा
✨ Performed Under Professional Supervision | विशेषज्ञ की देखरेख में
Your comfort, privacy & dignity matter.
आपकी सहजता, गोपनीयता और गरिमा हमारी प्राथमिकता है।
Consult an Ayurvedic physician before undergoing Yoni Pichu.
योनि पिचु करवाने से पहले योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक से परामर्श आवश्यक है।
Ayurvedic Massage Techniques | आयुर्वेदिक मसाज की तकनीकें
उचित तकनीक, उचित तैल और व्यक्ति की आवश्यकता के अनुसार किया गया अभ्यंग ही आयुर्वेदिक मसाज को विशिष्ट बनाता है।”
1. अंगुलि मर्दन (Finger Pressure) — उँगलियों के पोरों से हल्का या आवश्यकतानुसार दबाव देना।
2. हस्त मर्दन (Palm Pressure) — हथेली से शरीर के विभिन्न भागों पर नियंत्रित दबाव।
3. मुष्टि मर्दन (Fist Massage) — बंद मुट्ठी से उचित एवं नियंत्रित मर्दन।
4. अंगुष्ठ मर्दन (Thumb Pressure) — अंगूठे से चयनित बिंदुओं पर दबाव देना।
5. स्नेहन (Oil Massage) — औषधीय तैल से त्वचा पर स्निग्ध एवं लयबद्ध मालिश।
6. घर्षण (Friction) — हथेली या उँगलियों से नियंत्रित घर्षण द्वारा मसाज।
7. पीडन (Kneading/Compression) — मांसपेशियों एवं soft tissue को हल्के दबाव से मर्दन करना।
8. संवहन (Gentle Stroking) — लंबे, हल्के और लयबद्ध स्ट्रोक्स द्वारा मसाज।
9. वर्तुल मर्दन (Circular Massage) — उँगलियों या हथेली से गोलाकार गति में मसाज।
10. स्पर्श एवं मर्म मर्दन (Marma-based Touch) — चयनित मर्म क्षेत्रों पर सौम्य एवं नियंत्रित स्पर्श/दबाव।
Dhumapana Chikitsa | धूमपान चिकित्सा
धूमपान आयुर्वेद की एक शास्त्रीय ऊर्ध्वजत्रुगत चिकित्सा पद्धति है, जिसमें चिकित्सक द्वारा चयनित औषधीय द्रव्यों से निर्मित धूम का निर्धारित विधि से सेवन कराया जाता है।
आयुर्वेद में इसका प्रयोग मुख्यतः कफ-वात प्रधान ऊर्ध्वजत्रु विकारों में, उचित रोगी-परीक्षण के बाद किया जाता है। यह विशेष रूप से नासा, कण्ठ, शिरः एवं मुख क्षेत्र से संबंधित कुछ अवस्थाओं में चिकित्सकीय योजना का हिस्सा हो सकता है।
Dhumapana is a physician-guided Ayurvedic therapy in which medicated herbal smoke is administered through a prescribed method. It is distinct from tobacco smoking and should be performed only when clinically indicated.
✨ Ayurvedic Perspective | आयुर्वेदिक दृष्टिकोण
कफ-वात संतुलन हेतु चयनित अवस्थाओं में उपयोग
ऊर्ध्वजत्रु प्रदेश की चिकित्सा में सहायक
औषधि एवं रोगी की अवस्था के अनुसार धूम का चयन
योग्य आयुर्वेद चिकित्सक की देखरेख में ही प्रयोग
“धूमपानं तु वातश्लेष्महरं…”
— अष्टाङ्गहृदय, सूत्रस्थान
महत्वपूर्ण: धूमपान के प्रकार, औषधि, मात्रा और विधि रोगी की प्रकृति एवं रोगावस्था के अनुसार निर्धारित की जाती है। प्रत्येक व्यक्ति के लिए यह उपयुक्त नहीं है।
SRSDM® AYURVEDA – Panchkarma Clinic
वैद्य मनीष कुमार गहलोत | BAMS
Authentic Ayurvedic Care for Healthy Living
धूपन कर्म चिकित्सा | Dhoopana Karma Chikitsa
आयुर्वेद की पारंपरिक शोधन एवं संरक्षणात्मक चिकित्सा पद्धति।
A traditional Ayurvedic therapeutic fumigation procedure.
धूपन कर्म में चयनित औषधीय द्रव्यों से उत्पन्न धूम/धूप का चिकित्सकीय उद्देश्य से प्रयोग किया जाता है। आयुर्वेद में इसका उपयोग स्थान, रोगावस्था और दोषों के अनुसार किया जाता है।
औषधीय धूपन का प्रयोग चिकित्सकीय परामर्श एवं उचित विधि से ही किया जाना चाहिए।
प्रमुख उपयोग
🌿 वातावरण एवं स्थान की शुद्धि हेतु
🌿 कुछ स्थानीय/ऊर्ध्वजत्रु अवस्थाओं में चिकित्सकीय उपयोग
🌿 कफ-वात प्रधान स्थितियों में चयनित प्रयोग
🌿 पंचकर्म एवं अन्य आयुर्वेदिक उपचारों में आवश्यकता अनुसार सहायक प्रक्रिया
> “धूपनं तु विशेषेण शोधनं रक्षणं तथा।”
Ayurvedic Wellness & Rejuvenation
Restore balance, improve vitality and support overall wellbeing through personalized Ayurvedic guidance.
व्यक्तिगत आयुर्वेदिक मार्गदर्शन द्वारा शरीर-मन का संतुलन, ऊर्जा और समग्र स्वास्थ्य को बेहतर बनाने की दिशा में प्रयास।.
Rasayana Guidance
भूख पर भोजन का समय, नींद, तनाव, शारीरिक गतिविधि और कई स्वास्थ्य स्थितियों का प्रभाव पड़ सकता है। लगातार या अचानक बदलाव हो तो केवल घरेलू उपायों के बजाय कारण का मूल्यांकन जरूरी है।
Weight Management
Understand your body and develop a practical diet and lifestyle plan based on your Prakriti, Agni and daily routine.
प्रकृति, अग्नि और दिनचर्या के अनुसार व्यक्तिगत आहार एवं जीवनशैली द्वारा स्वस्थ वजन प्रबंधन का मार्गदर्शन।
Dinacharya Guidance
Build a healthier daily routine aligned with Ayurvedic principles to support digestion, energy and overall wellbeing.
आयुर्वेदिक सिद्धांतों के अनुसार ऐसी दैनिक दिनचर्या विकसित करें जो पाचन, ऊर्जा और समग्र स्वास्थ्य को support करे।
Ritucharya Guidance
Adapt your food, lifestyle and daily routine according to seasonal changes for better balance and wellbeing.
ऋतु परिवर्तन के अनुसार आहार, जीवनशैली और दिनचर्या में उचित बदलाव कर शरीर के संतुलन एवं स्वास्थ्य को बनाए रखने का मार्गदर्शन।
Power of Ayurveda
Step into a holistic approach to wellness where traditional Ayurvedic wisdom meets personalized care. Discover therapies designed to nurture your body, calm your mind, and restore natural balance.
Take the first step toward a healthier, happier life with authentic Ayurvedic care tailored just for you.
