Joint & Spine Disorders

Restore Mobility. Relieve Pain. Heal Naturally with Ayurveda.

Joint and spine disorders can affect your daily activities, mobility, and overall quality of life. At SRSDM Ayurveda, we provide personalized Ayurvedic treatments that focus on addressing the root cause of pain and inflammation rather than simply masking the symptoms. Through authentic Ayurvedic therapies, Panchakarma, herbal medicines, and lifestyle guidance, we help restore flexibility, strengthen joints, and support long-term musculoskeletal health.

Conditions We Treat


Sandhivata (Osteoarthritis) आयुर्वेद में वातदोष की वृद्धि से होने वाला एक सामान्य जोड़ों का रोग माना गया है। इसमें घुटनों, कूल्हों या अन्य जोड़ों में दर्द, जकड़न और चलने-फिरने में कठिनाई हो सकती है। SRSDM® AYURVEDA में रोगी की प्रकृति एवं अवस्था के अनुसार आयुर्वेदिक परामर्श, पंचकर्म, औषधि तथा जीवनशैली मार्गदर्शन प्रदान किया जाता है।

Gridhrasi (Sciatica) में कमर से नितंब और पैर तक दर्द, झुनझुनी या सुन्नपन महसूस हो सकता है। आयुर्वेद में इसे वातजन्य विकार माना गया है। रोगी की स्थिति के अनुसार पंचकर्म, बस्ति, अभ्यंग, स्वेदन एवं आयुर्वेदिक चिकित्सा द्वारा समग्र देखभाल की जाती है।

 

Amavata (Rheumatoid Arthritis) में जोड़ों में दर्द, सूजन, सुबह के समय जकड़न तथा चलने-फिरने में परेशानी हो सकती है। आयुर्वेद के अनुसार यह आम104 और वात दोष के असंतुलन से संबंधित माना जाता है। उपचार में आयुर्वेदिक औषधियाँ, पंचकर्म तथा उचित आहार-विहार का समन्वित उपयोग किया जाता है।

Manyastambha (Cervical Spondylosis) में गर्दन में दर्द, जकड़न, कंधों तक दर्द या हाथों में झुनझुनी हो सकती है। आयुर्वेदिक चिकित्सा में ग्रीवा बस्ति, अभ्यंग, स्वेदन तथा आवश्यकतानुसार पंचकर्म के माध्यम से समग्र उपचार किया जाता है।

Katishoola (Low Back Pain) आज की जीवनशैली में बहुत सामान्य समस्या है। लंबे समय तक बैठना, गलत मुद्रा या वातदोष की वृद्धि इसके कारण हो सकते हैं। आयुर्वेद में औषधि, पंचकर्म, कटि बस्ति, अभ्यंग तथा जीवनशैली सुधार के माध्यम से उपचार किया जाता है।

Avabahuka (Frozen Shoulder) में कंधे की गति सीमित हो जाती है तथा दर्द के कारण दैनिक कार्यों में कठिनाई होती है। आयुर्वेद में इसे वातजन्य विकार माना गया है। रोगी की स्थिति के अनुसार स्नेहन, स्वेदन, अग्निकर्म तथा अन्य उपयुक्त उपचार अपनाए जाते हैं।

Janu Sandhigata Vata (Knee Pain/Osteoarthritis of Knee) में घुटनों में दर्द, सूजन, चलने में कठिनाई और सीढ़ियाँ चढ़ने में परेशानी हो सकती है। आयुर्वेद में पंचकर्म, जानु बस्ति, औषधि तथा उचित व्यायाम के साथ समग्र उपचार प्रदान किया जाता है।

Vatarakta (Gout) में जोड़ों, विशेषकर पैर के अंगूठे में तीव्र दर्द, सूजन और लालिमा हो सकती है। आयुर्वेद में वात और रक्तदोष के असंतुलन को ध्यान में रखते हुए औषधि, आहार-विहार तथा पंचकर्म के माध्यम से उपचार किया जाता है।

Greeva Graha में गर्दन में लगातार जकड़न, दर्द और सिर घुमाने में कठिनाई हो सकती है। यह लंबे समय तक कंप्यूटर या मोबाइल के उपयोग से भी बढ़ सकता है। आयुर्वेद में ग्रीवा बस्ति, अभ्यंग, स्वेदन और जीवनशैली सुधार के माध्यम से उपचार किया जाता है।

Katigata Vata (Lumbar Spondylosis) में कमर में दर्द, अकड़न और चलने-फिरने में असुविधा हो सकती है। आयुर्वेदिक उपचार में रोगी की अवस्था के अनुसार पंचकर्म, बस्ति, अभ्यंग, औषधि तथा जीवनशैली परामर्श शामिल किया जाता है।

When Should You Consult
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