Digestive Disorders

Restore Digestive Balance with Authentic Ayurveda

A healthy digestive system is the foundation of overall well-being. Poor digestion can lead to acidity, bloating, constipation, indigestion, fatigue, and many chronic health concerns. At SRSDM Ayurveda, we focus on identifying the root cause of digestive disorders and restoring gut health through personalized Ayurvedic treatments, herbal medicines, Panchakarma therapies, and diet & lifestyle guidance.

Conditions We Treat


Amlapitta (Acidity / GERD) में सीने में जलन, खट्टी डकार, पेट में भारीपन और अपच जैसी समस्याएँ हो सकती हैं। आयुर्वेद में इसे पित्तदोष एवं अग्नि के असंतुलन से संबंधित माना गया है। SRSDM® AYURVEDA में आयुर्वेदिक परामर्श, औषधि, आहार-विहार एवं जीवनशैली मार्गदर्शन के माध्यम से समग्र देखभाल प्रदान की जाती है।

Agnimandya (Poor Digestion) में भूख कम लगना, भोजन का ठीक से न पचना, पेट भारी रहना तथा गैस बनने जैसी समस्याएँ हो सकती हैं। आयुर्वेद में स्वस्थ अग्नि को अच्छे स्वास्थ्य का आधार माना गया है। उपचार में आहार सुधार, आयुर्वेदिक औषधियाँ एवं दिनचर्या संबंधी सलाह दी जाती है।

Grahani (IBS) में बार-बार दस्त या कब्ज, पेट दर्द, गैस और अपच की समस्या हो सकती है। आयुर्वेद में यह अग्नि की कमजोरी और दोषों के असंतुलन से जुड़ा माना जाता है। उपचार में रोगी की प्रकृति के अनुसार औषधि, आहार एवं जीवनशैली का समन्वित प्रबंधन किया जाता है।

Vibandha (Constipation) में मल त्याग में कठिनाई, पेट साफ़ न होना, गैस और भारीपन की शिकायत हो सकती है। आयुर्वेद में इसे मुख्यतः वातदोष से संबंधित माना गया है। उचित आहार, पर्याप्त जल सेवन, दिनचर्या एवं आयुर्वेदिक चिकित्सा से इस समस्या के प्रबंधन में सहायता मिल सकती है।

Arsha (Piles) में मल त्याग के समय दर्द, रक्तस्राव, खुजली या मस्सों की समस्या हो सकती है। आयुर्वेद में आहार-विहार, औषधि तथा रोग की अवस्था के अनुसार उपयुक्त आयुर्वेदिक उपचार द्वारा समग्र देखभाल की जाती है।

Parikartika (Anal Fissure) में मल त्याग के समय तीव्र दर्द, जलन तथा कभी-कभी रक्तस्राव हो सकता है। आयुर्वेद में औषधि, स्थानीय देखभाल, आहार सुधार एवं कब्ज की रोकथाम पर विशेष ध्यान दिया जाता है।

Bhagandara (Fistula-in-Ano) गुदा के आसपास बनने वाली एक जटिल समस्या है, जिसमें दर्द, सूजन और स्राव हो सकता है। आयुर्वेद में रोग की अवस्था के अनुसार उपयुक्त चिकित्सा पद्धति अपनाई जाती है। समय पर चिकित्सकीय परामर्श आवश्यक है।

Yakrit Vikara (Liver Disorders) में फैटी लिवर, यकृत की कार्यक्षमता में कमी या अन्य यकृत संबंधी समस्याएँ शामिल हो सकती हैं। आयुर्वेद में आहार-विहार, दोष संतुलन और औषधियों के माध्यम से यकृत स्वास्थ्य के संरक्षण पर ध्यान दिया जाता है।

Adhmana (Gas & Bloating) में पेट फूलना, गैस बनना, डकार और असहजता महसूस हो सकती है। आयुर्वेद में इसे अग्नि विकार और वातदोष से संबंधित माना गया है। उचित आहार, जीवनशैली सुधार एवं आयुर्वेदिक औषधियों से राहत पाने में सहायता मिल सकती है।

Arochaka (Loss of Appetite) में भूख कम लगना, भोजन में अरुचि और कमजोरी महसूस हो सकती है। आयुर्वेद में यह अग्निमांद्य एवं दोष असंतुलन से जुड़ा माना जाता है। उपचार में पाचन शक्ति बढ़ाने, उचित आहार और जीवनशैली सुधार पर बल दिया जाता है।

When Should You Consult
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Frequent Acidity or Heartburn
Chronic Constipation
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Abdominal Pain
Indigestion
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